अमीर मीनाई शायरी – ख़ंज़र चले किसी पे तो

ख़ंज़र चले किसी पे तो तड़पते हैं हम अमीर,
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है । – अमीर मीनाई