अमीर मीनाई शायरी – गाहे गाहे की मुलाक़ात ही

गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है ‘अमीर’
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना – अमीर मीनाई