अमीर मीनाई शायरी – नावक-ए-नाज़ से मुश्किल है बचाना

नावक-ए-नाज़ से मुश्किल है बचाना दिल का
दर्द उठ उठ के बताता है ठिकाना दिल का! – अमीर मीनाई