अमीर मीनाई शायरी – सरकती जाए है रुख़ से

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता – अमीर मीनाई