अमीर मीनाई शायरी – हज़ारों काफ़िर ओ मोमिन पड़े

हज़ारों काफ़िर ओ मोमिन पड़े हैं सज्दे में
बुतों के घर में भी सामान है ख़ुदाई का – अमीर मीनाई