इरफ़ान सिद्दीक़ी शायरी – उस को मंज़ूर नहीं है

उस को मंज़ूर नहीं है मिरी गुमराही भी
और मुझे राह पे लाना भी नहीं चाहता है – इरफ़ान सिद्दीक़ी