इरफ़ान सिद्दीक़ी शायरी – वो थकन है कि बदन

वो थकन है कि बदन रेत की दीवार सा है
दुश्मन-ए-जाँ है वो पछुआ हो कि पुर्वाई हो – इरफ़ान सिद्दीक़ी