इक़बाल अज़ीम शायरी – आदमी जान के खाता है

आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे – इक़बाल अज़ीम