इक़बाल अज़ीम शायरी – चेहरों पे जो डाले हुए

चेहरों पे जो डाले हुए बैठे हैं नक़ाबें
उन लोगों को महफ़िल से उठा क्यूँ नहीं देते – इक़बाल अज़ीम