इक़बाल अज़ीम शायरी – मैं ने आँखों में छुपा

मैं ने आँखों में छुपा रक्खे हैं कुछ और चराग़
रौशनी सुब्ह की शायद न यहाँ तक पहुँचे – इक़बाल अज़ीम