क़तील शिफ़ाई शायरी – तर्क-ए-उल्फ़त की क़सम भी कोई

तर्क-ए-उल्फ़त की क़सम भी कोई होती है क़सम
तू कभी याद तो कर भूलने वाले मुझ को – क़तील शिफ़ाई