क़तील शिफ़ाई शायरी – तिरा ख़याल कुछ ऐसा निखर

तिरा ख़याल कुछ ऐसा निखर के आता है
तिरा विसाल भी इतना हसीं नहीं होता – क़तील शिफ़ाई