क़ाबिल अजमेरी शायरी – उन की पलकों पर सितारे

उन की पलकों पर सितारे अपने होंटों पे हँसी
क़िस्सा-ए-ग़म कहते कहते हम कहाँ तक आ गए! – क़ाबिल अजमेरी