क़ाबिल अजमेरी शायरी – कुछ देर किसी ज़ुल्फ़ के

कुछ देर किसी ज़ुल्फ़ के साए में ठहर जाएँ
‘क़ाबिल’ ग़म-ए-दौराँ की अभी धूप कड़ी है – क़ाबिल अजमेरी