क़ाबिल अजमेरी शायरी – ख़ुद तुम्हें चाक-ए-गिरेबाँ का शुऊर

ख़ुद तुम्हें चाक-ए-गिरेबाँ का शुऊर आ जाएगा,
तुम वहाँ तक आ तो जाओ हम जहाँ तक आ गए !! – क़ाबिल अजमेरी