कैफ़ी आज़मी शायरी – खड़ा हूँ कब से मैं

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नही मिलता । – कैफ़ी आज़मी