कैफ़ी आज़मी शायरी – जायेंगे कहाँ सूझता नहीं

जायेंगे कहाँ सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं
क्या तलाश है, कुछ पता नहीं
बुन रहे क्यूँ ख़्वाब दम-ब-दम – कैफ़ी आज़मी