कैफ़ी आज़मी शायरी – तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दूनिया को..
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है के नहीं.! – कैफ़ी आज़मी