कैफ़ी आज़मी शायरी – रेखाओं का खेल है मुक़द्दर

रेखाओं का खेल है मुक़द्दर,
रेखाओं से मात खा रहे हो ।
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो,
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो । – कैफ़ी आज़मी