ख़ुमार बाराबंकवी शायरी – ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त

ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है – ख़ुमार बाराबंकवी