ख़ुमार बाराबंकवी शायरी – गमे- दुनिया ने हमें जब

गमे- दुनिया ने हमें जब कभी नाशाद किया,
ऐ गमे-दोस्त तुझे हमने बहुत याद किया। – ख़ुमार बाराबंकवी