ख़ुमार बाराबंकवी शायरी – दुश्मनों से पशेमान होना पड़ा

दुश्मनों से पशेमान होना पड़ा,
दोस्तों का खुलूस आजमाने के बाद। – ख़ुमार बाराबंकवी