ख़ुमार बाराबंकवी शायरी – हैरत है तुम को देख

हैरत है तुम को देख के मस्जिद में ऐ ‘ख़ुमार’
क्या बात हो गई जो ख़ुदा याद आ गया – ख़ुमार बाराबंकवी