जिगर मुरादाबादी शायरी – जा और कोई ज़ब्त की

जा और कोई ज़ब्त की दुनिया तलाश कर
ऐ इश्क़ हम तो अब तिरे क़ाबिल नहीं रहे! – जिगर मुरादाबादी