जिगर मुरादाबादी शायरी – तूल-ए-गम-ए-हयात से घबरा न ऐ

तूल-ए-गम-ए-हयात से घबरा न ऐ जिगर…
ऐसी भी कोई शाम है… जिसकी सहर न हो – जिगर मुरादाबादी