जिगर मुरादाबादी शायरी – समझे थे तुझसे दूर निकल

समझे थे तुझसे दूर निकल जायेंगे कहीं…
देखा तो हर मुक़ाम तेरी रहगुज़र में है… – जिगर मुरादाबादी