दाग देहलवी शायरी – हो चुका तर्के तअल्लुक़ तो

हो चुका तर्के तअल्लुक़ तो जफ़ाएँ क्यूँ हों
जिनको मतलब नहीं रहता वो सताते भी नहीं – दाग देहलवी