नक़्श लायलपुरी शायरी – हमने क्या पा लिया हिंदू

हमने क्या पा लिया हिंदू या मुसलमाँ होकर।।
क्यों न इंसाँ से मुहब्बत करें इंसां होकर।। – नक़्श लायलपुरी