नासिर काज़मी शायरी – तिरे फ़िराक़ की रातें कभी

तिरे फ़िराक़ की रातें कभी न भूलेंगी
मज़े मिले इन्हीं रातों में उम्र भर के मुझे! – नासिर काज़मी