नासिर काज़मी शायरी – दयार-ए-दिल की रात में चिराग़

दयार-ए-दिल की रात में चिराग़ सा जला गया
मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक़्ल तो दिखा गया – नासिर काज़मी