निदा फ़ाज़ली शायरी – ग़म हो कि ख़ुशी दोनों

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है – निदा फ़ाज़ली