निदा फ़ाज़ली शायरी – फ़ासला नज़रों का धोखा भी

फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढा़ कर देखो…. – निदा फ़ाज़ली