परवीन शाकिर शायरी – कुछ इस तरह से निकलूँगी

कुछ इस तरह से निकलूँगी इस दुनिया को ठुकरा कर
मैं दुश्मन के भी चेहरे पर हैरानी छोड़ जाऊँगी – परवीन शाकिर