परवीन शाकिर शायरी – कुछ तो हवा भी सर्द

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी – परवीन शाकिर