परवीन शाकिर शायरी – ग़मे फ़िराक़ के किस्से निशात

ग़मे फ़िराक़ के किस्से, निशात वस्ल का ज़िक्र
रिवायतन ही सही, कोई बात तो करते – परवीन शाकिर