परवीन शाकिर शायरी – चाँद एक से मुसाफ़िर हैं

चाँद ;
एक से मुसाफ़िर हैं
एक सा मुकद्दर है
मैं ज़मीन पर तन्हा
और वो आसमानों में – परवीन शाकिर