फिराक गोरखपुरी शायरी – शिकवा-ए-शौंक करे क्या कोई उस

शिकवा-ए-शौंक करे क्या कोई उस शोख से जो….
साफ कायल भी नहीं… साफ मुकरता भी नहीं… – फिराक गोरखपुरी