बशीर बद्र शायरी – कोई हाथ भी न मिलाएगा

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो – बशीर बद्र