बशीर बद्र शायरी – दुश्मनी जम कर करो लेकिन

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे…
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों…! – बशीर बद्र