बशीर बद्र शायरी – बे-वक़्त अगर जाऊँगा सब चौंक

बे-वक़्त अगर जाऊँगा सब चौंक पड़ेंगे~
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा! – बशीर बद्र