बशीर बद्र शायरी – सब कुछ खाक हुआ है

सब कुछ खाक हुआ है लेकिन चेहरा क्या नूरानी है,
पत्थर नीचे बैठ गया है, ऊपर बहता पानी है। – बशीर बद्र