बशीर बद्र शायरी – हम-से मजबूर का ग़ुस्सा भी

हम-से मजबूर का ग़ुस्सा भी अजब बादल है
अपने ही दिल से उठे अपने ही दिल पर बरसे – बशीर बद्र