मजरूह सुल्तानपुरी शायरी – ये सच है जीना था

ये सच है जीना था पाप तुम बिन,
ये पाप मैने किया है अब तक,
मगर है मन में छवि तुम्हारी,
के जैसे मंदिर में लौ दिये की! – मजरूह सुल्तानपुरी