मजरूह सुल्तानपुरी शायरी – ए ग़म-ए-यार बता कैसे जिया

ए ग़म-ए-यार बता कैसे जिया करते है,
जिनकी तकदीर बिगड़ जाती है क्या करते है !! – मजरूह सुल्तानपुरी