मजरूह सुल्तानपुरी शायरी – देख ज़िन्दाँ से परे रंग-ए-चमन

देख ज़िन्दाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार,
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख !! – मजरूह सुल्तानपुरी