महेन्द्र सिंह बेदी सहर शायरी – जुस्तुजू उन की दर-ए-ग़ैर पे

जुस्तुजू उन की दर-ए-ग़ैर पे ले आई है
अब ख़ुदा जाने कहाँ तक मिरी रुस्वाई है – महेन्द्र सिंह बेदी सहर