मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – कहूँ किस से मैं कि

कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता! – मिर्ज़ा ग़ालिब