मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – जहाँ तेरा नक़्श-ए-क़दम देखते हैं

जहाँ तेरा नक़्श-ए-क़दम देखते हैं,
ख़याबाँ ख़याबाँ इरम देखते हैं !! – मिर्ज़ा ग़ालिब