मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – तेरे वादे पे जिए हम

तेरे वादे पे जिए हम तो ये जान झूठ जानां..
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता!! – मिर्ज़ा ग़ालिब