मीर तक़ी मीर शायरी – कहा सुनते तो काहे को

कहा सुनते तो काहे को किसी से दिल लगाते तुम,
न जाते उस तरफ तो हाथ से अपने न जाते तुम. – मीर तक़ी मीर